अभिवृद्धि एवं विकास

अभिवृद्धि एवं विकास 🔰
(GROWTH & DEVELOPMENT)

➤ मानव जीवन का प्रारम्भ गर्भावस्था से माना जाता है।
➤ अभिवृद्धि प्रारम्भ होती है- गर्भावस्था किन्तु विकास की अवस्था प्रारम्भ जन्म के पश्चात् होता हैं।
➤ विकास का प्रारम्भ – गर्भावस्था
➤ अभिवृद्धि एवं विकास दोनों ही एक बालक के लिए आवश्यक है। विकास से तात्पर्य किसी भी बालक के शारीरिक, मानसिक, सामाजिस एवं संवेगात्मक पक्षों में होने वाले परिवर्तन से है जबकि अभिवृद्धि से कार्य केवल शारीरिक पक्ष में होने वाले परिवर्तन से है।

विकास अभिवृद्धि

1.सम्पूर्ण पक्षों में परिवर्तन केवल शारीरिक पक्ष
में परिवर्तन
2.व्यापक है संकुचित है
3.जीवन पर्यन्त चलता है। निश्चित समय तक
(16-18)
4.निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बाल्यवस्था में कुछ
समय के लिए स्थाई
(मन्द गति)
5.विकास हमेशा चारों पक्षों में होता है- अभिवृद्धि केवल
शारीरिक पक्ष
को दशार्त

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