जालौर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि : Historical Background of Jalore
➤ महर्षि जाबालि की तपोभूमि होने के कारण जिले के प्रमुख नगर का नाम जाबालिपुर तथा कालान्तर में जालोर हुआ।Jalore District : Rajasthan Jila Darshan➤ यहां के प्रतिहार नरेश नागभट्ट द्वितीय ने अपनी राज्य सीमाओं का विस्तार अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी (सिन्ध से बंगाल) तक किया।
➤ अपनी राष्ट्रभक्ति और आन-बान के लिए समरांगण में मर-मिटने वाले सोनगरा चैहानों ने परमारों से छीनकर इसे अपनी राजधानी बनाया।
➤ जिले के तीन प्रमुख नगरों-जालोर, भीनमाल तथा सांचोर पर प्राचीन क्षत्रियों के प्रतिहार, परमार, चालुक्य, चौहान, खिलजी, पठान, मुगल और राठौड़ राजवंशों ने शासन किया।
➤ स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व वर्तमान जालोर जिला तत्कालीन जोधपुर रियासत(मारवाड़) का एक भाग था।
➤ प्रशासनिक दृष्टि से यह तीन परगनों या हुकूमतों-जालोर, जसवंतपुरा तथा सांचोर मेें विभक्त था।
➤ 30 मार्च, 1949 को राजस्थान निर्माण के समय जोधपुर रियासत के साथ ही इसका राजस्थान राज्य में विलय हो गया तथा जोधपुर संभाग का हिस्सा बना।
➤ विभिन्न जिलों का निर्माण हुआ तब वर्तमान जालोर जिला अपने अस्तित्व में आया।
जालौर की भौगोलिक स्थिति : Geography of Jalore
➤ जालोर जिला राजस्थान राज्य के दक्षिण-पश्चिम भाग में 24.45’’5’ उत्तरी अक्षांश से 25.48’’37’ उत्तरी अक्षांश तथा 71.7’ पूर्वी देशान्तर से 75.5’’53’ पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है।
➤ जिले का कुल क्षेत्रफल 10,564.44 वर्ग किलोमीटर है तथा राज्य का 3.11 प्रतिशत क्षेत्र घेरे हुए है।
➤ इस दृष्टि से राज्य में जिले का 13वां स्थान है।
➤ जिले की उत्तर-पश्चिमी सीमा पर बाड़मेर जिला, उत्तर पूर्वी सीमा पर पाली जिला, दक्षिण-पूर्वी सीमा पर सिरोही जिला तथा दक्षिण में गुजरात राज्य की सीमा लगती है।
➤ भूगर्भिक संरचना की दृष्टि से जिले का अधिकांश भाग चतुर्थ युगीन व अभिनूतन कालीन जमावों से आच्छादित है।
➤ ये जमाव वायु परिवहित रेत (बालु), नवीन कछारी मिट्टी, प्राचीन कछारी मिट्टी तथा ग्रिट के रुप में जिले के अधिकांश धरातल पर दृष्टिगोचर होते हैं।
➤ चट्टानों में मालानी ज्वालामुखीय तथा जालोर ग्रेनाइट प्रमुख हैं।
➤ भीनमाल तहसील के दक्षिण-पूर्वी भाग में जिले की सबसे ऊंची पहाड़ियां जसवंतपुरा की पहाड़ियां हैं।
➤ इसकी सबसे ऊंची चोटी सुन्धा 977 मीटर(3252) ऊंची है।
➤ यही इस जिले की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है।
➤ सम्पूर्ण जिला लूनी बेसिन का एक भाग है।
➤ अतः लूनी तथा उसकी सहायक जवाई, सूकड़ी, खारी, बाण्डी तथा सागी नदियां जिले के प्रवाह तन्त्र का निर्माण करती हैं।
➤ सभी नदियां बरसाती है।
➤ शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क जलवायु वाला जिला होने के कारण यहां वार्षिक एवं दैनिक तापांतर अधिक रहता है।
➤ वार्षिक वर्षा का औसत 43.4 सेन्टीमीटर है।
➤ जनवरी सबसे ठण्डा महीना होता है और न्यून्तम तापमान 1 या 2 डिग्री सेन्टीग्रेड से नीचे चला जाता है।
➤ मई-जून में तापमान सर्वाधिक ऊंचाई पर रहता है।
➤ औसत दैनिक उच्चतम तापमान 41 या 42 डिग्री सेन्टीग्रड रहता है।
➤ कुछ दिन तो तापमान 48 डिग्री सेन्टीग्रेड को भी पार कर जाता है।
जालौर की विशिष्ट कृषि उपज
➤ राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में होने वाली सामान्य फसलों के अतिरिक्त तीन विशिष्ट फसलों के रुप में जिले के कृषक सफलतापूर्वक उगाते हैं।
➤ लगभग 15 हजार हैक्टर क्षेत्र में सरसों की खेती होती है, जिससे लगभग एक लाख टन सरसों का उत्पादन होता है।
➤ जीरे की खेती लगभग 70 हजार हैक्टर में की जाती है जिससे लगभग 30 हजार टन जीरा उत्पन्न होता है।
➤ पूरे देश का 40 प्रतिशत ईसबगोल जिले में पैदा होता है। यह एक औषधीय फसल है।
➤ लगभग 40-45 हजार हैक्टर में ईसबगोल बोया जाता है तथा 25-30 हजार टन ईसबगोल प्राप्त होता है जिससे करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
➤ सब्जी की फसलों में टमाटर तथा फलों में बेदाना अनार जिले की विशिष्ट फसलें हैं
जालौर का तोपखाना ( Topkhana of Jalore, Rajasthan )
➤ जालोर का तोपखाना वस्तुतः परमार राजा भोज द्वारा बनवाई गई संस्कृत पाठशाला है।
➤ यह धार की भोजशाला की अनुकृति जान पड़ती है जिसे सरस्वती कण्ठाभरण पाठशाला के नाम से जाना जाता है।
➤ ऐसा प्रतीत होता है कि किसी कारणवश भोज इसका निर्माण पूरा नहीं करवा सका।
➤ रियासतकाल में इसमें जोधपुर राज्य की तोपें रखी जाती थीं और तब से इसका नाम तोपखाना पड़ा।
➤ इसी की अनुकृति जान पड़ता एक मन्दिर खण्डहर रूप में रानीवाड़ा के पास रतनपुर गांव में स्थित है।