अभिवृद्धि एवं विकास

अभिवृद्धि एवं विकास 🔰
(GROWTH & DEVELOPMENT)

➤ मानव जीवन का प्रारम्भ गर्भावस्था से माना जाता है।
➤ अभिवृद्धि प्रारम्भ होती है- गर्भावस्था किन्तु विकास की अवस्था प्रारम्भ जन्म के पश्चात् होता हैं।
➤ विकास का प्रारम्भ – गर्भावस्था
➤ अभिवृद्धि एवं विकास दोनों ही एक बालक के लिए आवश्यक है। विकास से तात्पर्य किसी भी बालक के शारीरिक, मानसिक, सामाजिस एवं संवेगात्मक पक्षों में होने वाले परिवर्तन से है जबकि अभिवृद्धि से कार्य केवल शारीरिक पक्ष में होने वाले परिवर्तन से है।

विकास अभिवृद्धि

1.सम्पूर्ण पक्षों में परिवर्तन केवल शारीरिक पक्ष
में परिवर्तन
2.व्यापक है संकुचित है
3.जीवन पर्यन्त चलता है। निश्चित समय तक
(16-18)
4.निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बाल्यवस्था में कुछ
समय के लिए स्थाई
(मन्द गति)
5.विकास हमेशा चारों पक्षों में होता है- अभिवृद्धि केवल
शारीरिक पक्ष
को दशार्त

राजस्थान के जातीय लोकनृत्य

💠 गरासिया वालर नृत्य – बिना किसी वाद्य यंत्र के स्त्री-पुरुषों द्वारा दो अर्द्धवृतों में धीमी गति का नृत्य।कूद नृत्य – गरासिया स्त्री-पुरुषों द्वारा तालियों की ध्वनि पर बिना वाद्य यंत्र का नृत्य।जवारा नृत्य – होली दहन के समय स्त्री-पुरुषों द्वारा नृत्य।लूर नृत्य – लूर गौत्र की स्त्रियों द्वारा वधू पक्ष से रिश्ते की मांग करने का नृत्य।मोरिया नृत्य – विवाह के अवसर पर पुरुषों का समुह नृत्य।मांदल नृत्य – मांगलिक अवसरों  पर स्त्रियों का वृताकार नृत्य।रायण नृत्य – मांगलिक अवसरों पर पुरुषों का नृत्य।गौर नृत्य– गणगौर पर स्त्री-पुरुषों का सामूहिक नृत्य।💠 भीलगवरी(राई) नृत्य – गवरी उत्सव पार्वती की आराधना में 40 दिन चलता है। इसमें शिव व भस्मासुर की कथा का अधिक प्रचलन है। शिव को पुरिया और मसखरे को कुटकुड़िया कहा जाता हैं।गैर नृत्य – होली के अवसर पर भील पुरुषों द्वारा किया जाने वाला सामूहिक वृताकार नृत्य।नेजा नृत्य – होली व मांगलिक अवसरों पर भील स्त्रियों का सामूहिक खेल-नृत्य।द्विचक्री नृत्य – विवाह वह मांगलिक अवसरों पर पुरुष बाहरी वृत और महिलाएं अंदर के  वृत में नाचती है।घूमरा नृत्य – मांगलिक अवसरों पर भील महिलाओ द्वारा ढोल व थाली पर किया जाने वाला नृत्य।हाथीमना नृत्य – विवाह के अवसर पर किया जाता है।युद्धनृत्य नृत्य – दो दलों द्वारा युद्ध का अभिनय करते हुए किया जाता है।💠 कथोड़ीमावलिया नृत्य – नवरात्रों में उदयपुर के कथोड़ी पुरुषों द्वारा किया जाने वाला समूह नृत्य।होली नृत्य – होली के अवसर पर कथौड़ी  महिलाओं द्वारा किया जाने वाला समुह नृत्य।💠 सहरियाशिकारी नृत्य –  बाँरा जिले के सहरिया पुरुषों द्वारा शिकार का अभिनय करते हुए किया जाता है।लहँगी नृत्य – सहरियो का सामूहिक नृत्य।💠 कंजरचकरी नृत्य – कंजर बालाओ द्वारा तेज गति से किया जाने वाला चक्राकार  नृत्य, जो हाड़ौती क्षेत्र में प्रसिद्ध है।धाकड़ नृत्य – कंजरो द्वारा झाला पाव की विजय की खुशी में किया जाने वाला युद्ध नृत्य।💠 कालबेलियाइण्डोणी नृत्य – स्त्री पुरुषों द्वारा पूँगी व खंजरी वाद्य पर किया जाने वाला वृताकार नृत्य।शंकरिया नृत्य –  कालबेलियों का आकर्षक प्रेमकथा आधारित युगल-नृत्य।पणिहारी नृत्य – पणिहारी गीत के साथ युगल-नृत्य।बागड़िया नृत्य – स्त्रियों द्वारा भीख मांगते समय किया जाता है गुलाबो ने कालबेलिया नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई।💠 गुर्जरचरी नृत्य – किशनगढ़ अजमेर क्षेत्र में गुर्जर महिलाएं मांगलिक अवसरों पर सिर पर चरी बर्तन से दीपक जलाकर नृत्य करती है फलकूबाई प्रसिद्ध चरी नृत्यांगना है।💠 मेवरणबाजा रतवई नृत्य – स्त्री-पुरुषों द्वारा मिलकर मांगलिक अवसरों पर किया जाता है मेव स्त्रियां सिर पर इण्डोणी व खारी नृत्य करती है और पुरुष अलगोचा व टामक बजाते है।

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP
(Indira Gandhi Canal Project)

✔️ उपनाम :- मरु गंगा तथा रेगिस्तान की जीवन रेखा ।

✔️ प्रारम्भिक नाम :- राजस्थान नहर ।

✔️ 2 नवम्बर 1984 को इन्दिरा गाँधी के नाम पर इसका वर्तमान नाम रखा।

✔️ इस परियोजना का प्रारम्भिक प्रारूप सार्दुल सिंह द्वारा तैयार किया गया था व मुख्य अभियन्ता कंवर सेन थे, इस परियोजना की प्रारम्भिक लागत 64 करोड़ रूपये अनुमानित थी ।

✔️ कंवर सेन ने अपने प्रतिवेदन “बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता’ में प्रथम बार अपनी इन महत्वाकांक्षी योजना का प्रारुप तैयार किया ।

✔️ 1953 में केन्द्रीय सिंचाई तथा नौवहन आयोग द्वारा परियोजना की प्रथम रिपोर्ट तैयार की गई जिसे विश्व बैंक द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई । इस परियोजना का शुभारम्भ 31 मार्च 1958 को तत्कालीन गृहमंत्री गोविन्द वल्लभ पंत द्वारा किया गया ।

✔️ 19 दिसम्बर 1958 को राजस्थान नहर बोर्ड का गठन किया गया तथा इसका प्रथम अध्यक्ष कंवर सेन को बनाया गया

✔️ 11 अक्टूम्बर 1961 को भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन ने “रावतसर शाखा के नौरंगदेसर वितरिका में जल प्रवाहित कर इस परियोजना को में जल प्रवाह का शुभारम्भ किया गया ।

नोट :- इस परियोजना में जल वितरण हेतू शाखाओं का निर्माण किया जाना प्रस्तावित था, परन्तु लिफ्ट परियोजना का निर्माण किया जाना प्रस्तावित नही था । सन् 1963 में पहली बार लिफ्ट परियोजना को भी इस परियोजना के प्रारूप में शामिल किया गया । सन् 1968 में इस परियोजना की प्रथम लिफ्ट नहर कंवर सेन लिफ्ट नहर का कार्य प्रारम्भ हुआ

✔️ इस परियोजना में सिंचित क्षेत्र के विकास हेतु 1974 में सिंचाई क्षेत्र विकास कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया ।

नहर प्रारूप

✔️ इन्दिरा गाँधी नहर का उद्गम व्यास तथा सतलज नदी के संगम पर स्थित हरिके बैराज फिरोजपुर, पंजाब (Harike Barrage Ferozepur, Punjab) से होता है । इस नहर की कुल लम्बाई 649 किलोमीटर है । (हरिके बैराज फिरोजपुर (पंजाब) से मोहनगढ़ (जैसलमेर) तक)

✔️ इसमें 204 किलोमीटर राजस्थान फीडर (Rajasthan feeder) की लम्बाई है । जो हरिके बैराज से मसीतावली (हनुमानगढ़) तक है ।

नोट :- मसीतावली से मोहनगढ़ (जैसलमेर) तक राजस्थान मुख्य नहर (Rajasthan Main Canal) है जो 445 किलोमीटर लम्बी है । इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना का अंतिम बिन्दु (जीरो प्वाईंट) गडरा रोड़ बाड़मेर ((Zero Point) Gadra Road Barmer) है । मोहनगढ़ (जैसलमेर) (Mohangarh (Jaisalmer)) से बाबा रामदेवरा (Baba Ramdevra) एक उपशाखा निकाली गई है ।

✔️ राजस्थान फीडर राजस्थान नहर को जलापूर्ति करती है । राजस्थान फीडर की लम्बाई 204 किलोमीटर है जिसका विभाजन निम्नानुसार है –

राजस्थान में ➡️ 34 किलोमीटर
हरियाणा में ➡️ 19 किलोमीटर
पंजाब में ➡️ 151 किलामीटर

☛ इन्दिरा गाँधी नहर में जल वितरण हेतु 9 शाखाओं का निर्माण किया गया –

  1. रावतसर शाखा (Rawatsar Branch)
  2. पूगल शाखा (Pugal Branch)
  3. सागरमल गोपा शाखा (Sagarmal Gopa Branch)
  4. अनुपगढ़ शाखा (Anupgarh Branch)
  5. चारण वाला शाखा (chaaran vala Branch)
  6. दातोर वाला शाखा (Dator Vala Branch)
  7. सुरतगढ़ शाखा (Suratgarh Branch)
  8. राजा बीरबलराम शाखा (Raja Birbalram Branch)
  9. बरसलपुर शाखा (Barsalpur Branch)

राजस्थान में सिंचाई, पेयजल एवं जल प्रबंधन में लिफ्ट नहर योजना : एक नजर:-

लिफ्ट नहर योजना का नाम ➡️ जिला

1.कोलायत लिफ्ट नहर योजना ➡️ बीकानेर
2.गजनेर लिफ्ट नहर योजना ➡️ बीकानेर
3.बागडसर लिफ्ट नहर योजना ➡️ बीकानेर
4.पोकरण लिफ्ट नहर योजना ➡️ जैसलमेर
5.फलौदी लिफ्ट नहर योजना ➡️ जोधपुर
6.गंधेली-सहवा लिफ्ट नहर योजना➡️चुरू
7.बरकतुल्ला खाँ लिफ्ट नहर योजन-बाड़मेर